शुक्रवार, 14 मई 2021

IndianHistory : जैन धर्म तथा महावीर स्वामी

नमस्कार दोस्तों ,

आज के इस ब्लॉग में हम जैन धर्म तथा महावीर स्वामी के बारे में चर्चा करेंगे . 



 जैन धर्म :-

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं l


प्रथम तीर्थंकर :- ऋषभदेव 

  • ये अयोध्या के राजा थे.
  • इनका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है . 
  • ये जैन धर्म के संस्थापक थे 
23 वें  तीर्थंकर :- पार्श्वनाथ 
  • ये काशी के राजा अश्वसेन और वामा के पुत्र थे 
  • इनके अनुयायी "निर्ग्रन्थ" कहलाते हैं 
  • इन्होंने अपने अनुयायियों को चार आयाम दिए , जिन्हें "चतुर्याम" कहा जाता है 
  1. सत्य 
  2. अहिंसा 
  3. अस्तेय 
  4. अपरिग्रह 
  • महावीर स्वामी के माता पिता इनके अनुयायी थे
  • पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी के मध्य 250 वर्ष का अंतराल है 

24 वें तीर्थंकर :- महावीर स्वामी 

  • इन्हें जैन धर्म का वास्तविक संथापक माना जाता है 
  • हमें इनके कई नाम मिलते है . जैसे :
  1. वर्धमान : - बचपन का नाम 
  2. जिन :- विजेता 
  3. महावीर :- अतुल पराक्रम करने वाला 
  4. निर्ग्रन्थ :- बंधन रहित 
  5. अर्हत :- योग्य 
  6. निगटठ नाथ पुत :- बौद्ध ग्रंथों में उल्लेखित नाम 
  7. केवलिन :- कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति के कारण   

महावीर स्वामी :

  • इनका जन्म 540 ईपू / 599 ईपू में वैशाली के निकट कुण्डग्राम में हुआ 
  • इनका जन्म ज्ञातृक क्षत्रिय कुल में हुआ था 
  • इनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रिय कुल के प्रधान थे तथा माता त्रिशला लिच्छवी नरेश चेटक की बहन थी 
  • मातृपक्ष से वो मगध के हर्यक वंश के राजाओं - बिम्बिसार तथा अजातशत्रु के निकट सम्बन्धी थे 
  • इनके बचपन का नाम वर्द्धमान था 
  • इनका विवाह कुन्दिन्य गोत्र की कन्या यशोदा के साथ हुआ था 
  • इनकी पुत्री का नाम अणोज्जा / प्रियदर्शना था , जिसका विवाह महावीर स्वामी ने अपनी बहन सुदर्शना के पुत्र जामाली के साथ किया था 
  • जामाली प्रारंभ में महावीर स्वामी का शिष्य बना परन्तु उसने ही जैन धर्म में प्रथम भेद किया था 
  • कल्पसूत्र से पता चलता है कि बुद्ध के समान वर्द्धमान के विषय में भी ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि वे या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेंगे या महान तपस्वी 
  •   महावीर स्वामी ने 30 वर्ष की आयु में बड़े भाई नन्दिवर्द्धन की आज्ञा से गृहत्याग किया 
  • 12 वर्ष की कठोर तपस्या के पश्चात ऋजुपालिका नदी के किनारे ऋज्जम्भिक ग्राम में महावीर स्वामी को साल वृक्ष के नीचे कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और वो केवलिन कहलाये  
  • महावीर स्वामी ने अपना पहला उपदेश  12 गणधरों को राजगृह के निकट विपुलाचल पहाड़ी पर दिया था 
  • इन 12 गणधरों में से मक्खिलपुत्र गोशाल ( आजीवक संप्रदाय के संस्थापक ) के अलग हो जाने के कारण महावीर स्वामी ने केवल 11 गणधरों के साथ जैन संघ की स्थापना की 
  • महावीर स्वामी ने अपना अंतिम उपदेश मल्ल गणराज्य की राजधानी पावापुरी में राजा सस्तीपाल के महल में दिया था 
  • 72 वर्ष की आयु में पावापुरी में 468 ईपू / 527 ईपू में उन्होंने शरीर त्याग दिया 

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बहुत बहुत धन्यवाद 

आपका अपना 
देवकरण गंडास 
व्याख्याता इतिहास 

4 टिप्‍पणियां:

  1. अपना ज्ञान हमारे साथ साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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  2. यह तो सम्पूर्ण वीडियो का सारांश बता दिया आपने बहुत बहुत धन्यवाद सर जी

    जवाब देंहटाएं

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