रविवार, 21 नवंबर 2021

रेजांग ला की लड़ाई

रेजांग ला की लड़ाई


संदर्भ:


18 नवंबर, 2021 को ‘रेजांग ला’ की लड़ाई (Battle of Rezang La) को 59 वर्ष पूरे हो गए। इस अवसर पर रक्षा मंत्री द्वारा लद्दाख के चुशुल में पुनर्निर्मित रेजांग ला स्मारक का उद्घाटन किया गया।


रेजांग ला’ की अवस्थिति:


‘रेजांग ला’ (Rezang La) लद्दाख में ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (Line of Actual Control – LAC) पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा है।


यह दर्रा ‘चुशुल’ गाँव और स्पैंग्गुर त्सो (Spanggur Tso) झील के बीच अवस्थित है। स्पैंग्गुर त्सो झील, भारतीय और चीनी दोनों क्षेत्रों में फैली हुई है।

‘रेजांग ला’ में 18 नवंबर 1962 को एक वीरतापूर्ण युद्ध लड़ा गया था।

इस लड़ाई के बारे में:


1962 के भारत-चीन युद्ध में 13 कुमाऊं रेजीमेंट के सैनिकों ने ‘रेजांग ला’ में हुई लड़ाई में चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ को कई मुठभेड़ों में हराया था।


संख्या में काफी कम होने के बाबजूद, रेजीमेंट के सैनिकों ने अत्यधिक कम तापमान और सीमित गोला-बारूद के साथ लड़ाई लड़ी और आख़िरी सैनिक के जीवित रहने तक युद्ध जारी रखा।


इस क्षेत्र का महत्व:


रेजांग ला, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चुशुल घाटी’ की सुरक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण है। किसी आक्रमणकारी के इस स्थान तक पहुचने के बाद, उसे ‘लेह’ तक का खुला मार्ग मिल सकता है।

शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

💠प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना💠

➡️संदर्भ:


‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति’ (Cabinet Committee on Economic Affairs) ने सड़कों और पुलों के निर्माण के शेषकार्यों को पूरा करने के लिए ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’-I और II को सितंबर, 2022 तक जारी रखने हेतु अपनी मंजूरी दे दी है।

समिति द्वारा ‘वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों’ (Left Wing Extremism) के लिए ‘सड़क संपर्क परियोजना’ को मार्च, 2023 तक जारी रखने के लिए भी मंजूरी दी गई है।

तीन योजनाओं के तहत परिकल्पित कार्यों को पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़ा दी गई है।

➡️आवश्यकता:


उत्तर-पूर्व और पर्वतीय राज्यों में कोविड लॉकडाउन, ज्यादा समय तक बारिश होने,सर्दी, वन संबंधी मुद्दों के कारण ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’-I (PMGSY-I) और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’-II (PMGSY- II) के तहत के तहत अधिकांश कार्य लंबित हैं।

साथ ही, ये राज्य केंद्र सरकार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित इन महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध करते रहे हैं।

➡️‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY) के बारे में:


👉‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY), 25 दिसंबर, 2000 को लॉन्च की गयी थी।

👉उद्देश्य: सड़क मार्गो से बिना जुड़े हुए आवासीय क्षेत्रों को सभी मौसमों के अनुकूल सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करना।

👉पात्रता: जनगणना-2001 के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक जनसंख्या वाली और उत्तर-पूर्व तथा हिमालयी राज्यों में 250 से अधिक जनसंख्या वाली सड़क से वंचित बस्तियां।

👉अनुदान: पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के संबंध में, केंद्र सरकार द्वारा परियोजना लागत का 90% वहन किया जाता है, जबकि अन्य राज्यों के लिए केंद्र सरकार लागत का 60% वहन करती है।

➡️प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: चरण –I


PMGSY-I को दिसंबर, 2000 में 100% केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया था।
योजना के तहत 1,35,436 बसावटों को सड़क संपर्क प्रदान करने और खेतों से बाजार तक संपर्क सुनिश्चित करने के लिए 3.68 लाख किमी मौजूदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का लक्ष्य रखा गया था।

➡️प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- चरण II:


बाद में, भारत सरकार द्वारा अपनी समग्र दक्षता में सुधार हेतु मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क के 50,000 किलोमीटर का उन्नयन करने के लिए वर्ष 2013 में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’- चरण II (PMGSY-II) शुरू किया गया।

हालाँकि, PMGSY – I के तहत भी कार्य जारी रहा, और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के दूसरे चरण के तहत, ग्रामीण संपर्क के लिए पहले से ही बनाई गई सड़कों को ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए अपग्रेड किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

➡️चुनौतियां:


👉समर्पित धनराशि की कमी
👉पंचायती राज संस्थाओं की सीमित भागीदारी
👉अपर्याप्त निष्पादन और अनुबंध क्षमता
👉विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों में ‘कामकाजी मौसम’ की कमी और दुर्गम इलाके
👉निर्माण सामग्री की कमी
👉‘वामपंथी उग्रवाद क्षेत्रों’ में सुरक्षा संबंधी चिंताएं

➡️‘वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना’:


👉इस योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गयी।
👉इसके तहत, 9 राज्यों, अर्थात आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के 44 जिलों में 11,725 ​​करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सामरिक महत्व के 5,412 किलोमीटर लंबी सड़कों और 126 पुलों के निर्माण/उन्नयन का कार्य शुरू किया गया।
👉गृह मंत्रालय ने राज्यों और सुरक्षा बलों के परामर्श से इस योजना के तहत सड़कों और पुलों के कार्यों का चयन किया गया है।
👉योजना के तहत, सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘अन्य जिला सड़कें’ (Other District Roads), ग्रामीण सड़कें (Village Roads) और मौजूदा प्रमुख जिला सड़कों (Major District Roads) का उन्नयन किया जाएगा।
👉इसके अलावा, सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन सड़कों पर 100 मीटर तक की लंबाई वाले पुलों को भी वित्त पोषित किया जाएगा।

गुरुवार, 18 नवंबर 2021

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

🔘भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक🔘


🔘संदर्भ:

16 नवंबर को सीएजी कार्यालय परिसर में पहला ‘लेखा-परीक्षण दिवस’ (Audit Diwas) मनाया गया।

‘लेखा-परीक्षण दिवस’, ‘भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक’ (Comptroller and Auditor General of India – CAG) संस्था की ऐतिहासिक शुरुआत और पिछले कई वर्षों में शासन, पारदर्शिता तथा जवाबदेही में इसके योगदान को रेखांकित करने के लिए मनाया जा रहा है।

🔘CAG के बारे में:

👉भारत के संविधान के भाग V के अंतर्गत अध्याय V में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक स्वतंत्र पद का प्रावधान किया गया है।
👉भारत के संविधान में CAG का उल्लेख अनुच्छेद 148 – 151 के तहत किया गया है।
👉यह भारतीय लेखा परीक्षण तथा लेखा विभाग के प्रमुख होते हैं।
👉यह लोक वित्त के संरक्षक तथा देश की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था के नियंत्रक होते हैं। इसका नियंत्रण राज्य एवं केंद्र दोनों स्तरों पर होता है।
👉इसका कर्तव्य भारत के संविधान एवं संसद की विधियों के तहत वित्तीय प्रशासन को बनाए रखना है।

🔘संवैधानिक पद पर नियुक्ति एवं कार्यकाल:

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
CAG का कार्यकाल 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।

🔘कर्तव्य:

👉भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारत की संचित निधि, प्रत्येक राज्य की संचित निधि तथा प्रत्येक संघ शासित प्रदेश, जहाँ विधान सभा हो, से सभी व्यय संबंधी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
👉वह भारत की संचित निधि और भारत के लोक लेखा सहित प्रत्येक राज्य की आकस्मिक निधि तथा लोक लेखा से सभी व्यय की लेखा परीक्षा करता है।
👉वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के किसी भी विभाग द्वारा सभी ट्रेडिंग, विनिर्माण, लाभ और हानि खातों, बैलेंस शीट और अन्य अनुषंगी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
👉वह केंद्र और प्रत्येक राज्य द्वारा अनुदान प्राप्त सभी निकायों और प्राधिकरणों की प्राप्तियों और व्यय की लेखा परीक्षा करता है, इसके साथ ही संबध नियमों द्वारा आवश्यक होने पर सरकारी कंपनियों, अन्य निगमों एवं निकायों का भी लेखा परीक्षण करता है।
👉वह किसी कर अथवा शुल्क की शुद्ध आगमों का निर्धारण एवं प्रमाणन करता है और इन मामलों में उसका प्रमाणपत्र अंतिम होता है।
👉नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) संसद की ‘लोक लेखा समिति’ (Public Accounts Committee– PAC) के मार्गदर्शक, मित्र और दार्शनिक के रूप में कार्य करते हैं।

🔘प्रतिवेदन (रिपोर्ट):

👉भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, केंद्र और राज्य के खातों से संबंधित अपनी लेखा प्रतिवेदन राष्ट्रपति और राज्यपाल को सौंपते है, जिसे वे क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं।
👉CAG राष्ट्रपति को तीन लेखा प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है: विनियोग लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट, वित्त लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट तथा सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट।
 


बुधवार, 17 नवंबर 2021

राष्ट्रीय गोकुल मिशन

राष्ट्रीय गोकुल मिशन


संदर्भ:

हाल ही में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ (Rashtriya Gokul Mission) के प्रदर्शन पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ क्या है?

सरकार द्वारा, राष्ट्रीय पशु प्रजनन और डेयरी विकास कार्यक्रम (National Programme for Bovine Breeding and Dairy Development – NPBBD) के तहत दुधारू पशुओं की स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विकास हेतु वर्ष 2014 में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ शुरू किया गया था।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

1.  दुधारू पशुओं की स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण।
2. स्वदेशी पशुओं के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम। इससे पशुओं में अनुवांशिक सुधार और पशुओं की संख्या में वृद्धि संभव होगी।
3. दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की कोशिश।
4. साहीवाल, राठी, देउनी, थारपारकर, रेड सिन्धी और अन्य कुलीन स्वदेशी नस्लों के जरिए बाकी नस्लों को उन्नत बनाना।
5. प्राकृतिक सेवा के लिए उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों का वितरण।

योजना का कार्यान्वयन:

1. राष्ट्रीय गोकुल मिशन राज्यों के पशुधन विकास बोर्ड जैसे संस्थानों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
2. राज्य गौसेवा आयोग को ‘राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (State Implementing Agency- SIA) के तहत ‘पशुधन विकास बोर्ड’ के प्रस्ताव को प्रायोजित करने और इन प्रायोजित प्रस्तावों की निगरानी का आदेश दिया गया है।
3. स्वदेशी पशु विभाग में सर्वश्रेष्ठ जर्मप्लाज्म सहित महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली एजेंसियों, जैसे CCBF, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि या पशुपालन विश्वविद्यालय, कॉलेज, एनजीओ, सहकारी समितियां और गौशालाएं इसमें प्रतिभागी एजेंसियां हैं।

‘गोकुल ग्राम’ क्या हैं?

गोकुल ग्राम देशी पशु केंद्र और अधिनियम स्वदेशी नस्लों के विकास के लिए केंद्र के रूप में काम कर रहे है।

इस योजना के लिए फंड एकीकृत स्वदेशी पशु केंद्र, गोकुल ग्राम की स्थापना के लिए दिया जाता है।
गोकुल ग्राम मूल प्रजनन इलाकों और शहरी आवास के लिए मवेशियों के पास महानगरों में स्थापित किये जाते है।

गोकुल ग्राम की भूमिका एवं दायित्व:

1. गायों के प्रजनन क्षेत्र में किसानों को उच्च आनुवंशिक प्रजनन स्टॉक की आपूर्ति के लिए एक भरोसेमंद स्रोत है। गोकुल ग्राम किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र में आधुनिक सुविधाएं देता है।
2. 1000 जानवरों की क्षमता वाले इन गोकुल ग्रामों में दुग्ध उत्पादक और अनुत्पादक पशुओं का अनुपात 60:40 होता है।
3. गोकुल ग्राम, पशुओं के पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए घर में चारा उत्पादित करने के लिए बनाये गए हैं।
4. गोकुल ग्राम वास्तव में एक आर्थिक संस्थान की तर्ज पर विकसित किया गया है, जिसमें निम्नलिखित वस्तुओं की बिक्री के जरिए आर्थिक संसाधन पैदा किया जा रहे है: दूध जैविक खाद केंचुआ–खाद मूत्र डिस्टिलेट घरेलू खपत के लिए बायो गैस से बिजली का उत्पादन पशु उत्पादों की बिक्री आदि।
5. महानगरीय गोकुल ग्राम में शहरी मवेशियों के आनुवंशिक उन्नयन पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।

करतारपुर कॉरिडोर

करतारपुर कॉरिडोर


संदर्भ:

सरकार द्वारा, इस सप्ताह पाकिस्तान के लिए ‘करतारपुर साहिब गुरुद्वारा कॉरिडोर’ (Kartarpur Sahib Gurudwara corridor) को फिर से खोलने पर विचार किया जा रहा है, जिससे सिख तीर्थयात्रियों को सीमा पार यात्रा करने की सुविधा मिल सकेगी। विदित हो कि, कोरोनावायरस महामारी के कारण, यह गलियारा करीबन 20 महीने पहले बंद कर दिया गया था।

इस गलियारे को 19 नवंबर को खोले जाने की योजना है। इस दिन सिख धर्म के संस्थापक ‘गुरु नानक’ की जयंती है, जिसे ‘गुरुपरब’ या “प्रकाश पर्व” के नाम से भी जाना जाता है।

करतारपुर कॉरिडोर समझौता:

कृपया ध्यान दें, कि ‘करतारपुर कॉरिडोर समझौते’ के तहत तीर्थयात्रियों को इस कॉरिडोर से बगैर किसी वीजा के यात्रा करने की अनुमति दी जाती है।

सभी धर्मों के भारतीय तीर्थयात्री और भारतीय मूल के व्यक्ति इस गलियारे का उपयोग कर सकते हैं।
तीर्थयात्रियों को केवल एक वैध पासपोर्ट ले जाने की आवश्यकता होती है;
भारतीय मूल के व्यक्तियों को अपने देश के पासपोर्ट के साथ ओसीआई कार्ड ले जाने की आवश्यक होता है।
यह कॉरिडोर सुबह से शाम तक खुला रहता है। सुबह के समय यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन लौटना होता है।

“करतारपुर कॉरिडोर” परियोजना क्या है?

‘करतारपुर साहिब गुरुद्वारा कॉरिडोर’ को प्रायः “शांति का मार्ग” भी कहा जाता है। यह कॉरिडोर (गलियारा), भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित ‘गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक’ को पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित ‘गुरुद्वारा दरबार साहिब’ से जोड़ता है।

तीर्थस्थान एवं इसका महत्व:

करतारपुर गुरुद्वारा, रावी नदी के तट पर लाहौर से लगभग 120 किमी उत्तर पूर्व में स्थित है।
इस स्थान पर ही गुरु नानक ने सिख समुदाय को इकट्ठा किया था और वर्ष 1539 तक मृत्युपर्यंत, अपने जीवन के अंतिम 18 साल इसी स्थान पर गुजारे।
आमतौर पर, सीमा पर उगने वाली हाथी घास को पाकिस्तानी अधिकारी काट देते हैं, जिसके बाद यह ‘गुरुद्वारा’ भारत की सीमा से ही दिखने लगता है।
भारतीय सीमा की तरफ से दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भारतीय सिख इकठ्ठे होते हैं, और इनकी सुविधा के लिए ‘गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक’ में दूरबीन लगाई जाती है।
 

स्रोत: द हिंदू।

 

मंगलवार, 16 नवंबर 2021

रानी कमलापति

रानी कमलापति


संदर्भ:

हाल ही में, भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘रानी कमलापति’ स्टेशन कर दिया गया है।

लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से निजी भागीदारी के साथ इस स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है। ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ मॉडल के तहत पिछले कुछ वर्षों के दौरान कराए गए कार्यों में, यह भारत में ‘स्टेशन पुनर्विकास’ क्षेत्र में इस तरह का पहला बड़ा कार्य है ।

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‘रानी कमलापति’ कौन थी?

  • ‘रानी कमलापति’ (Rani Kamlapati), 18वीं शताब्दी में ‘गोंड वंश’ के शासक ‘निज़ाम शाह’ की विधवा पत्नी थीं। भोपाल से 55 किमी दूर तत्कालीन गिन्नौरगढ़ रियासत पर इनका शासन था।
  • अपने पति की हत्या के बाद, ‘रानी कमलापति’ अपने शासनकाल के दौरान हमलावरों का बहादुरी से सामना करने के लिए जानी जाती हैं।
  • कमलापति “भोपाल की अंतिम हिंदू रानी” थीं। इन्होने अपने शासनकाल में जल प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए तथा कई पार्कों और मंदिरों की स्थापना की।

‘गोंड’ कौन हैं?

गोंड (Gonds) भारत के सबसे बड़े आदिवासी समुदायों में से एक हैं। इस जनजातीय समुदाय के लोग मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और ओडिशा में पाए जाते हैं।

current affairs

 

निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019

निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019


संदर्भ:

हाल ही में, ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ (Personal Data Protection Bill) पर विमर्श करने हेतु गठित ‘संसदीय समिति’ द्वारा निम्नलिखित सिफारिशें की गयी हैं:

विधेयक के मौजूदा मसौदे में ‘सरकार के लिए दी गयी छूटों’ के संदर्भ में, इन छूटों का लाभ उठाए जाने पर उचित प्रतिबंध लगाकर सीमित किया जाए।

सरकार को केवल “न्यायसंगत, निष्पक्ष, उचित और यथोचित प्रक्रिया” के तहत छूट दी जानी चाहिए।

सरकार, “अनाम डेटा सहित” गैर-निजी डेटा को ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ के दायरे से बाहर रख सकती है।

पृष्ठभूमि:

‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ 2019 के मसौदे को वर्ष 2019 में एक ‘संयुक्त संसदीय समिति’ (JPC) के लिए भेजा गया था। इस समिति को विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी रिपोर्ट एवं सिफारिश देने का कार्य सौंपा गया था।

संबंधित प्रकरण:

वर्तमान में, ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल के विवादास्पद अनुच्छेद 35 में, सरकार और उसकी एजेंसियों को विधेयक के किसी भी और सभी प्रावधानों का पालन करने से, बगैर किसी रोक-टोक के, पूरी छूट दिए जान का प्रावधान है।

आधार प्राधिकरण UIDAI और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां, पहले ही इस विधेयक के प्रावधानों से छूट दिए जाने की मांग कर रही हैं।


निजी डेटा संरक्षण (PDP) विधेयक 2019:

इस विधेयक की उत्पत्ति का स्रोत, न्यायमूर्ति बी.एन. श्री कृष्णा की अध्यक्षता में गठित एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में देखा जा सकता है।

‘निजता के अधिकार’ संबंधी मामले (जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ) में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान, सरकार द्वारा इस समिति का गठन किया गया था।

निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 में डेटा विनियमन:

विधेयक में तीन प्रकार की निजी जानकारी को शामिल किया गया हैं:

गंभीर

संवेदनशील

सामान्य

अन्य प्रमुख प्रावधान:

डेटा स्वामी: विधेयक के अनुसार, डेटा स्वामी (Data principal) वह व्यक्ति है जिसका डेटा संग्रहीत और संसाधित किया जा रहा है।

सोशल मीडिया कंपनियां: जिन सोशल मीडिया कंपनियों को डेटा की मात्रा और संवेदनशीलता के साथ-साथ उनके कारोबार जैसे कारकों के आधार पर महत्वपूर्ण डेटा न्यासी माना जाता है, उन्हें अपना स्वयं का उपयोगकर्ता सत्यापन तंत्र विकसित करना होगा।

एक स्वतंत्र नियामक ‘डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी’ (DPA) द्वारा आकलन और ऑडिट की देखरेख की जाएगी।

प्रत्येक कंपनी में एक डेटा संरक्षण अधिकारी (DPO) होगा, जो लेखा परीक्षा, शिकायत निवारण, रिकॉर्डिंग रखरखाव और अधिक के लिए DPA के साथ संपर्क करेगा।

विधेयक के अंतर्गत, व्यक्तियों को डेटा पोर्टेबिलिटी का अधिकार, और अपने स्वयं के डेटा तक पहुंचने और स्थानांतरित करने की अधिकार भी प्रदान किया गया है।

भुलाए जाने का अधिकार: इस अधिकार के तहत, किसी व्यक्ति को डेटा संग्रह और इसके प्रकाशित करने के संबंध में सहमति को हटाने की अनुमति दी गयी है।

अपवाद एवं छूट:

निजी डेटा संरक्षण (पीडीपी) विधेयक 2019 में, एक विवादास्पद अनुच्छेद 35 शामिल किया गया है, जिसके तहत “भारत की संप्रभुता और अखंडता,” “सार्वजनिक व्यवस्था”, “विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध” और “राज्य की सुरक्षा” संबंधी मामले का हवाला देकर केंद्र सरकार को सरकारी एजेंसियों के लिए इस अधिनियम के सभी या किसी भी प्रावधान को निलंबित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

विधेयक से संबंधित चिंताएं:

यह विधेयक दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर यह विधेयक, भारतीयों को डेटा-स्वामित्व का अधिकार देकर उनके निजी डेटा की रक्षा करता है, वहीं दूसरी ओर,विधेयक में केंद्र सरकार को छूट दी गयी है, जोकि निजी डेटा को संसाधित करने के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

सरकार द्वारा, जरूरत पड़ने पर ‘डेटा-स्वामियों’ की स्पष्ट अनुमति के बगैर संवेदनशील निजी डेटा को भी संसाधित किया जा सकता है।

स्रोत: द हिंदू।

रेजांग ला की लड़ाई

रेजांग ला की लड़ाई संदर्भ: 18 नवंबर, 2021 को ‘रेजांग ला’ की लड़ाई (Battle of Rezang La) को 59 वर्ष पूरे हो गए। इस अवसर पर रक्षा ...