मंगलवार, 16 नवंबर 2021

निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019

निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2019


संदर्भ:

हाल ही में, ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ (Personal Data Protection Bill) पर विमर्श करने हेतु गठित ‘संसदीय समिति’ द्वारा निम्नलिखित सिफारिशें की गयी हैं:

विधेयक के मौजूदा मसौदे में ‘सरकार के लिए दी गयी छूटों’ के संदर्भ में, इन छूटों का लाभ उठाए जाने पर उचित प्रतिबंध लगाकर सीमित किया जाए।

सरकार को केवल “न्यायसंगत, निष्पक्ष, उचित और यथोचित प्रक्रिया” के तहत छूट दी जानी चाहिए।

सरकार, “अनाम डेटा सहित” गैर-निजी डेटा को ‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ के दायरे से बाहर रख सकती है।

पृष्ठभूमि:

‘निजी डेटा संरक्षण विधेयक’ 2019 के मसौदे को वर्ष 2019 में एक ‘संयुक्त संसदीय समिति’ (JPC) के लिए भेजा गया था। इस समिति को विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी रिपोर्ट एवं सिफारिश देने का कार्य सौंपा गया था।

संबंधित प्रकरण:

वर्तमान में, ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल के विवादास्पद अनुच्छेद 35 में, सरकार और उसकी एजेंसियों को विधेयक के किसी भी और सभी प्रावधानों का पालन करने से, बगैर किसी रोक-टोक के, पूरी छूट दिए जान का प्रावधान है।

आधार प्राधिकरण UIDAI और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां, पहले ही इस विधेयक के प्रावधानों से छूट दिए जाने की मांग कर रही हैं।


निजी डेटा संरक्षण (PDP) विधेयक 2019:

इस विधेयक की उत्पत्ति का स्रोत, न्यायमूर्ति बी.एन. श्री कृष्णा की अध्यक्षता में गठित एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में देखा जा सकता है।

‘निजता के अधिकार’ संबंधी मामले (जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ) में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान, सरकार द्वारा इस समिति का गठन किया गया था।

निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 में डेटा विनियमन:

विधेयक में तीन प्रकार की निजी जानकारी को शामिल किया गया हैं:

गंभीर

संवेदनशील

सामान्य

अन्य प्रमुख प्रावधान:

डेटा स्वामी: विधेयक के अनुसार, डेटा स्वामी (Data principal) वह व्यक्ति है जिसका डेटा संग्रहीत और संसाधित किया जा रहा है।

सोशल मीडिया कंपनियां: जिन सोशल मीडिया कंपनियों को डेटा की मात्रा और संवेदनशीलता के साथ-साथ उनके कारोबार जैसे कारकों के आधार पर महत्वपूर्ण डेटा न्यासी माना जाता है, उन्हें अपना स्वयं का उपयोगकर्ता सत्यापन तंत्र विकसित करना होगा।

एक स्वतंत्र नियामक ‘डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी’ (DPA) द्वारा आकलन और ऑडिट की देखरेख की जाएगी।

प्रत्येक कंपनी में एक डेटा संरक्षण अधिकारी (DPO) होगा, जो लेखा परीक्षा, शिकायत निवारण, रिकॉर्डिंग रखरखाव और अधिक के लिए DPA के साथ संपर्क करेगा।

विधेयक के अंतर्गत, व्यक्तियों को डेटा पोर्टेबिलिटी का अधिकार, और अपने स्वयं के डेटा तक पहुंचने और स्थानांतरित करने की अधिकार भी प्रदान किया गया है।

भुलाए जाने का अधिकार: इस अधिकार के तहत, किसी व्यक्ति को डेटा संग्रह और इसके प्रकाशित करने के संबंध में सहमति को हटाने की अनुमति दी गयी है।

अपवाद एवं छूट:

निजी डेटा संरक्षण (पीडीपी) विधेयक 2019 में, एक विवादास्पद अनुच्छेद 35 शामिल किया गया है, जिसके तहत “भारत की संप्रभुता और अखंडता,” “सार्वजनिक व्यवस्था”, “विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध” और “राज्य की सुरक्षा” संबंधी मामले का हवाला देकर केंद्र सरकार को सरकारी एजेंसियों के लिए इस अधिनियम के सभी या किसी भी प्रावधान को निलंबित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

विधेयक से संबंधित चिंताएं:

यह विधेयक दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर यह विधेयक, भारतीयों को डेटा-स्वामित्व का अधिकार देकर उनके निजी डेटा की रक्षा करता है, वहीं दूसरी ओर,विधेयक में केंद्र सरकार को छूट दी गयी है, जोकि निजी डेटा को संसाधित करने के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

सरकार द्वारा, जरूरत पड़ने पर ‘डेटा-स्वामियों’ की स्पष्ट अनुमति के बगैर संवेदनशील निजी डेटा को भी संसाधित किया जा सकता है।

स्रोत: द हिंदू।

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