वैदिक साहित्य ( Vaidik Literature ) :
नमस्कार दोस्तों ,
आज के लेख में हम वैदिक साहित्य के बारे में चर्चा करेंगे . आज का यह लेख मुख्यतः ऋग्वेद पर केन्द्रित है.
इस लेख में हम निम्न बिन्दुओं पर चर्चा करेंगे :
1. वेद क्या हैं ?
2. ऋग्वेद के संहिता, ब्राह्मन, आरण्यक और उपनिषद् ग्रन्थ
3. ऋग्वेद के 10 मंडल और उनके संकलन कर्ता ऋषि
4. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
तो आइये इन पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हैं
1. वेद ( Ved ):-
👉 वेद शब्द विद् धातु से निर्मित है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - जानना .
अर्थात वे ग्रन्थ जो ज्ञान से परिपूर्ण हैं वो वेद कहलाये .
- श्रुति : वेदों को श्रुति भी कहा जाता है क्योंकि ये श्रवण परम्परा पर आधारित ग्रन्थ हैं.
- अपौरुषेय : वेदों को मानवीय रचना न मानकर ईश्वरीय रचना के रूप में देखा जाता है , अतः इन्हें अपौरुषेय भी कहा जाता है .
- वेदत्रयी : वेदत्रयी में केवल तीन वेदों को सम्मिलित किया गया है : ऋग्वेद , सामवेद तथा यजुर्वेद .
- अथर्ववेद को उस पर अवैदिक परंपरा के प्रभाव के कारण वेदत्रयी से बाहर रखा गया है.
1.संहिता
2. ब्राह्मण ग्रन्थ
3. आरण्यक
4. उपनिषद
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2. ऋग्वेद ( Rigved ) :-
जैसा कि हमने अभी चर्चा की , प्रत्येक वेद के चार भाग होते हैं . तो अब चर्चा करते हैं ऋग्वेद के इन चारों भों पर
- संहिता : ऋग्वेद की संहिता का नाम ऋक संहिता या ऋग्वैदिक संहिता है.
- ब्राहमण ग्रन्थ : ऋग्वेद के ब्राहमण ग्रन्थ ऐतरेय ब्राहमण तथा कौषुतिकी ब्राहमण है.
- आरण्यक : ऋग्वेद के आरण्यक ग्रन्थ ऐतरेय आरण्यक तथा कौषुतिकी आरण्यक है.
- उपनिषद : ऋग्वेद के उपनिषद ग्रन्थ ऐतरेय उपनिषद तथा कौषुतिकी उपनिषद है.
- ऋग्वेद का उपवेद : आयुर्वेद है .
- ऋग्वेद का पुरोहित : होता या होतृ कहलाता है , जो मंत्रवाचन करता है.
- महर्षि पतंजलि के अनुसार ऋग्वेद की 21 शाखाएं उपलब्ध थी .
- चरण व्यूह के लेखक के अनुसार ऋग्वेद की पांच शाखाएं उपलब्ध हैं :
- शाकल
- वाष्कल
- शांखायन
- माण्डुकायन
- आश्वलायन
- वर्तमान में केवल शाकल शाखा ही उपलब्ध है और इसी का ऋग्वैदिक संहिता के रूप में अध्ययन किया जाता है .
- शाकल शाखा में 10 मंडल विद्यमान हैं , इस कारण ऋग्वेद को दसतयी भी कहा जाता है .
- ऋग्वेद में मंडलों को अनुवाकों में, अनुवाकों को सूक्तों में तथा सूक्तों को श्लोकों में विभाजित किया गया है .
- इस प्रकार ऋग्वेद की शाकल शाखा में कुल - 10 मंडल , 85 अनुवाक , 1028 ( 1017 + 11 ) सूक्त तथा 10580 श्लोक हैं.
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3. ऋग्वेद के 10 मंडल और उनके संकलन कर्ता ऋषि :
मंडल सूक्त संकलन कर्ता ऋषि
प्रथम 191 मधुछंदा तथा विश्वामित्र
दूसरा 43 गृहत्समद
तृतीय 62 विश्वामित्र
चतुर्थ 58 वामदेव
पंचम 87 अत्रि
षष्ठम 75 भारद्वाज
सप्तम 104 वशिष्ठ
अष्टम 92 कण्व
नवम 114 पवमान
दशम 191 विभिन्न ऋषि समूह
- ऋग्वेद में दुसरे से सातवाँ मंडल सबसे प्राचीन हैं. इसके बाद आठवां मंडल जोड़ा गया तथा पहला और दशम मंडल सबसे अंत में जोड़े गये हैं .
- दुसरे से सातवें मंडल को ऋषि मंडल / परिवार मंडल / गोत्र मंडल के नाम से भी जाना जाता है .
- आठवें मंडल को प्रगठ मंडल के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसमें मिश्रित छंदों का प्रयोग किया गया है .
- दुसरे से सातवें मंडल का प्रारंभ अग्नि की स्तुति से होता है . इसमें दुसरे स्थान पर इंद्र को रखा गया है.
- ऋग्वेद के तीसरे मंडल में गायत्री मन्त्र मिलता है.
- ऋग्वेद के सातवें मंडल में दसराज्ञ युद्ध का विवरण मिलता है. इस मंडल का संकलन सरस्वती नदी के किनारे किया गया था.
- ऋग्वेद का नवम मंडल कर्मकांडीय मंडल है . यह सोम देवता को समर्पित है.
- ऋग्वेद के दशम मंडल में प्रसिद्द पुरुष सूक्त का उल्लेख मिलता है , जिसमें चारों वर्णों की उत्पति का दैवीय सिद्धांत मिलता है.
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अन्य महत्वपूर्ण तथ्य :
- ऋग्वेद का सबसे प्राचीनतम सूक्त उषा सूक्त ( अरोरा सूक्त ) है तथा यह सबसे सुन्दरतम सूक्त माना जाता है .
- ऋग्वेद के वार्ता सूक्त में उर्वशी तथा पुरुरवा के मध्य वार्ता का उल्लेख मिलता है .
- ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल में हमें अजमीढ़ , पुरुमीढ़ तथा त्रास दस्यु नामक शासकों का उल्लेख मिलता है.
[ G7 समूह के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें : https://devgandas.blogspot.com/2021/05/g7.html ]
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तो दोस्तों कैसा लगा आपको हमारा आज का लेख . आप अपने कमेंट के माध्यम से सूचित जरुर करें .
धन्यवाद
आपका अपना
देवकरण गंडास
व्याख्याता इतिहास

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