शनिवार, 15 मई 2021

G7 समूह और भारत

 नमस्कार दोस्तों ,

आपने समाचार में सुना होगा कि 11 मई 2021 को विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 47वें G7 शिखर सम्मलेन की यात्रा को कोरोना के कारण रद्द कर दिया है. 

प्रधानमंत्री मोदी को G7 सम्मलेन में शामिल होने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जोनसन ने आमंत्रण भेजा था .

आज के लेख में हम जानेंगे कि यह G7 समूह क्या है ? इसके सदस्य राष्ट्र कौन कौन हैं ? और यह किस प्रकार काम करता है ?

तो प्रारंभ करते हैं आज का लेख ...



👉 G7 क्या है ? ( What is G7 )

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी।
  • वैश्विक आर्थिक शासन, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे सामान्य हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये वार्षिक तौर पर संगठन के सदस्य देशों की बैठक आयोजित की जाती है।
  • G-7 संगठन का कोई औपचारिक संविधान और स्थायी मुख्यालय नहीं है। वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान लिये गए निर्णय सदस्य देशों पर गैर-बाध्यकारी होते हैं।
  • G7 दुनिया की सात सबसे बड़ी कथित विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं. इसे ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं.
  • यह समूह खुद को "कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज" यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है. स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि और सतत विकास, इसके प्रमुख सिद्धांत हैं.
  • G7 की पहली बैठक साल 1975 में हुई थी. तब सिर्फ 6 देश इस ग्रुप में शामिल थे. फिर अगले साल कनाडा भी इस ग्रुप में शामिल हो गया. इस तरह ये G6 से बन गया G7. पहली बैठक में दुनियाभर में आर्थिक संकट के संभावित समाधानों पर चर्चा की गई थी.
  • वर्ष 1997 में रूस के इस समूह में शामिल होने के बाद कई वर्षों तक G-7 को 'G- 8' के रूप में जाना जाता रहा। 
  • हालाँकि रूस को वर्ष 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद समूह से निष्कासित कर दिये जाने के पश्चात् समूह को एक बार पुनः G-7 कहा जाने लगा।
  • इसके शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्र प्रमुख, यूरोपीयन कमीशन और यूरोपीयन काउंसिल के अध्यक्ष शामिल होते हैं.

👉 किन मुद्दों पर होती है चर्चा ?

  • G7 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के मंत्री और नौकरशाह आपसी हितों के मामलों पर बातचीत के लिए हर साल मिलते हैं. 
  • सदस्य देश उन मद्दों पर बातचीत करते हैं, जिनका वैश्विक महत्व होता है. 
  • इसमें आर्थिक, विदेश, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दे शामिल होते हैं. 
  • यहां उन मुद्दों पर भी बातचीत की जाती है, जिनपर राजनीतिक कार्रवाई की जरूरत होती है या आम लोगों से जुड़ा होता है.

👉 चीन इसका हिस्सा क्यों नहीं है ?

  • चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह यह है कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती हैं और प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है.
  • ऐसे में चीन को उन्नत या विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जाता है, जिसकी वजह से यह समूह में शामिल नहीं है.
  •  हालांकि चीन जी-20 देशों के समूह का हिस्सा है, इस समूह में शामिल होकर वह अपने यहां शंघाई जैसे आधुनिकतम शहरों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहा है.

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तो कैसा लगा आपको आज का ये लेख , आप अपने कमेंट के माध्यम से सूचित करें .

धन्यवाद 

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